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अदना सा यह दिल ही तो है क्यों इस का बुरा माने,
अब तुम पे आ गया तो कोई तो बात होगी,
नादान है यह दिल भी,नहीं मानता किसी की,
नहीं जानता कि अब तो मुश्किल में जान होगी,
अब दिन होंगे रुसवाई के और ग़म की रात होगी,
साँसत में ज़िंदगी होगी, जाने कब मुलाक़ात होगी,
मस्तिष्क तो मानता है, हम तुम नहीं मिल सकते,
पर दिल की अपनी ही कोई सोच ख़ास होगी,
साज़िश है कोई कुदरत की,यही सोच मैं रही हूँ,
ऐसी सजा हो दिलजलों की, यही रवायत् होगी,
या प्यार भरे दिलों की,यह दिलकश सौग़ात होगी।
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